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पते की बात

ख़ामोश रात बातें हज़ार, आख़िरी मुलाक़ात यादें हज़ार।  

गणतंत्रता दिवस

गणतंत्रता दिवस  आफ्टर सम टाइम्स आई ऍम बैक  68 गणतंत्रता दिवस की शुभकामनाये।  आज का दिन हमारे देश और देशवाशियों के लिए महत्वपूर्ण दिन है जिसमे आजादी होने बाद मुल्क को एक सिस्टम में और उसके हिसाब से प्रणाली चलाने के लिए संविधान लागू किया गया, फिर भी हमे आज हमारे देश की स्थिति देखने से ऐसा प्रभाव तो है परंतु दिनबदिन खतरनाक दिखाई देती है जिससे हर व्यक्ति सोचे जो झुलस जाये, कि जैसा सोच के काम शुरू किया गया मुझे नही लगता की उस कायदे पर अभी भी सब मुयाना करने में मशगूल है सबको अपनी पड़ी है जो आने वालो दिनों में भयानक साबित हो सकती है।  धार्मिक-सामाजिक-पारिवारिक, हर स्तर पर बंधा है हर कोई  गणतंत्रता एक जज्बा है, जो हर दिल में सुलगता है यह वो अनबुझी प्यास है  जिससे हर कोई झुलसता है।  जय हिन्द जय भारत जय छत्तीसगढ़ 

बर्फीले मौसम

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बर्फीले मौसम  ठण्ड की चादर ओढ़े ऐसे बैठे है कब्रिस्तान लायक प्लेटफॉर्म में (ट्रेन लेट है)  जैसे की कब्र का रखवाला दौरा कर जाता।  वैसे भी ऐरे-गैरे लोगों के लिए प्रतीक्षायल खोला  नहीं जाता।   सुबह सुबह स्वयं  से ली गयी तस्वीर 

खामोश

चार कपडे ज्यादा और नकाब पहन नुमाइंदो को खामोश कर  जाते है  फिर वो मेरा लिबास उतार कर मुझे बर्फ जैसी बेदाग और सफ़ेद चादरों में लपेट जाते है। 

परेशानी

परेशानी की भी शक्‍ल हो सकती है। कुत्‍ता, तवायफ, चुड़ैल, शैतान...सो जाए या जागता रहे, वो परेशान ही रहता है।

सुबह की चाय

नहीं हूँ परेशां कभी और ख्वाबो के कारोबार का गुमान करता है फिर जाहिर करने के लिए मुख़्तलिफ़ जगहों और वक़्तों का चुनाव करता है 

विदेशी ठण्ड

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सफर दो कदम का मंजिल दूर तलक  सफर का क्या है कहा से शुरू और कहा ख़त्म पता ही नही चलता की आखिर क्या चल रहा है। फ़िलहाल अपना भागदौड़ का सिस्टम खारकीव नामक शहर की यायावर जिंदगानी में दिनचर्या भी काटना ख़ुशी के साथ साथ कुछ वाकया भी सहना पड़ता है जैसे की ठण्ड का मौसम भारी संकट वाला सिस्टम है। घर में तो जैसे भी काट जाता है पर जब बात हो बहार जाना है तो इतना ठण्ड की अब अपने मुल्क से तो भारी है। रस्ते चलते लिए हुए एक फोटो विदेशी ठण्ड