Posts

जग जागे तब सवेरा

Image
जब जागे तब सवेरा  अनायास ही जब किसी चीज के बारे में बेमतलब और जबरदस्ती किया जाये तो एक हद तक ठीक भी है।  मैं याद करता हु वो दिन जब बचपन में भले ही न कोई होशियारी,चालाकी और न ही सूझबूझ पर एक बात है हम सच्चे जरूर 100 परसेंट थे।  ये उस शीर्षक के बारे में बात होने जा रही है जिसके शीर्षक का सारांश ही गुप्तनुमा है वैसे कुछ तो चीजे गुप्त होनी ही चाहिए पर क्या मतलब जो हमें दुःख देने का कारण बने तो ये भी सही नहीं है।  जो चीज कभी हम सोच न सके आखिर क्यों इस तरह चली जा रही है खुद के मना करने के बावजूद ऐसा लगता है कभी कभी की यूँ ही चलता रहा तो मंजिल के रास्तो में कही थोड़ी धुंधलाहट आ ही जानी है।  अगर ये सच है की बदल जाये तो आगे कही न कही जरूर अपने आप को सहायता जरूर मिलेगी।  वैसे भी इस सब में किसी को दोषी ठहरा नहीं सकते हालाँकि तसल्लीनुमा जायज ठहराया जा सकता है।  पर अब कोशिश तो यही रहेगी की इस नियमावली को ही सीढ़ी बनाकर आगे चला जायेगा।                 ( "डर लगता है कभी कभी ये जहाँ ये गुलिस्तां कही ह...

यूनिवर्सिटी

Image
बीड़ू ये है अपना यूनिवर्सिटी  गर्मी में एक मित्र द्वारा लिया गया छायाचित्र 

विदेशी गर्मी

Image
व्यस्त रहित समय रहते भी समय रहता नहीं ऐसे माहौल में कही निकल जाना बड़ी बात हो जाती है।  ठंडी ठंडी हवा 12 डिग्री टेम्परेचर और गर्मी का एहसास।  स्थान- यूक्रेन (खारकीव) यूरोप

शौकियाना अंदाज

Image
हम भी कभी ड्राइव का बहुत ज्यादा शौख रखते थे  मैं घर से कही जा रहा था तब जंगल में १ नंबर के लिए उतरा और फोटो लिया गया 

अंधेर नगरी चौपट राजा

Image
अंधेर नगरी चौपट राजा  अंधेर नगरी चौपट राजा टेक शेर भाजी टेक शेर खाजा ये बहुत पुरानी कहावत है आप सबने सुना ही होगा।  अचानक मेरे दिमाग में कुछ  आया जब मैं बिस्तर पर लेटा था की ये जो बात है ये हम पर भी कही ना कही लागू हो ही जाती है। कुछ परिस्थिति ऐसी होते है जब हमको अपना मौलिक अधिकार मालूम होते हुए भी क्योंकि हम भारतीय है, जहाँ पर हमारा ऐसा शोषण और तिरस्कार झेलना पड़ता है जो हमें मालूम तो होता पर कुछ कर नहीं सकते है पर फ़िल्मी स्टाइल में भले ही बात बोल भी दे की अरे कुछ नई होता असल जिंदगी में  ना ना पर प्रैक्टिकल रूप से ये बात नहीं जमती।  क्योंकि कुछ ऐसे नुमाइंदे पलते है हमारे बिच जो अपने लोगो के द्वारा ही पाली गयी ऐसा कह सकते है,जिसका दुःख हमें झेलना पड़े हालाँकि उस आये हुए परिस्थिति को अपनी ही गलती या कोई मज़बूरी बता कर अपने आप को संतोष करना ही पड़ता है और कोई दूसरा ऑप्शन ही नहीं है।  आखिर कर हम समझौता कर ही लेते है और अपने आप में चलने लगते है. अब तो वजीर चल पड़ी है चाल सही हो ना हो जीत संभव है।

MANALI TRANCE

Image
मनाली से रोहतक उनचास किलोमीटर पहाड़ी सिंगल रास्ता स्कार्पियो में 6  मित्र एक महिला मित्र और स्कार्पियो चालक। चालक भैया काफी एक्सपीरियंस थे कोई फ़िक्र नहीं करने दिया निश्चिन्त  बहुत ही डरावना और मजेदार सफर था।  चतुराई दिखाते हुए मैं आगे वाली सीट पे झट से बैठ गया फिर हम निकल पड़े मजे करते हुए इधर उधर का नजारे का लुफ्त उठाते हुए। 

मनाली (रोहतक) के खूबसूरत पल का एक सेल्फी

Image
अहा क्या दिन थे वो भी